विद्यार्थी जीवन (Student Life) कई वर्षों की एक कठोर एक तपस्या है। एक आदर्श विद्यार्थी इस तपस्या के माध्यम से ही स्वयं को इस योग्य बनता है कि समाज व देश को सशक्त बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा सके और एक आदर्श नागरिक के रूप में स्वयं को स्थापित कर सके। विद्यार्थी जीवन में ही देश के भावी नागरिक का चरित्र निर्माण होता है, ऐसे में एक विद्यार्थी का कर्त्तव्य है कि वह इस अवसर का पूर्ण सदुपयोग करे और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान सुनिश्चित करे। "काक चेष्टा बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च। अल्पाहारी गृह त्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं॥" इस श्लोक में एक विद्यार्थी के पाँच मुख्य लक्षण बताये गए हैं जो उसे आदर्श विद्यार्थी के रूप में स्थापित करते हैं। १. काक चेष्टा-कौवे की तरह प्रयत्नशील (Keep trying like a CROW): कौवे को एक बुद्धिमान पक्षी के रूप में जाना जाता है। आप सभी ने बचपन में कौवे की एक कहानी सुनी होगी। 'एक बहुत प्यासा कौवा पानी की तलाश में मीलों का सफर तय करता है, रास्ते में उसे एक घड़ा मिलता है जिसमें कम पानी होने की वजह से वह उस...