विद्यार्थी जीवन (Student Life) कई वर्षों की एक कठोर एक तपस्या है। एक आदर्श विद्यार्थी इस तपस्या के माध्यम से ही स्वयं को इस योग्य बनता है कि समाज व देश को सशक्त बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा सके और एक आदर्श नागरिक के रूप में स्वयं को स्थापित कर सके। विद्यार्थी जीवन में ही देश के भावी नागरिक का चरित्र निर्माण होता है, ऐसे में एक विद्यार्थी का कर्त्तव्य है कि वह इस अवसर का पूर्ण सदुपयोग करे और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान सुनिश्चित करे।
"काक चेष्टा बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च।
अल्पाहारी गृह त्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं॥"
इस श्लोक में एक विद्यार्थी के पाँच मुख्य लक्षण बताये गए हैं जो उसे आदर्श विद्यार्थी के रूप में स्थापित करते हैं।
१. काक चेष्टा-कौवे की तरह प्रयत्नशील (Keep trying like a CROW): कौवे को एक बुद्धिमान पक्षी के रूप में जाना जाता है। आप सभी ने बचपन में कौवे की एक कहानी सुनी होगी। 'एक बहुत प्यासा कौवा पानी की तलाश में मीलों का सफर तय करता है, रास्ते में उसे एक घड़ा मिलता है जिसमें कम पानी होने की वजह से वह उसे पीने में असमर्थ रहता है लेकिन फिर भी वह हार न मान कर घड़े में एक-एक करके कई कंकड़ डालता है जिससे पानी ऊपर आ जाता है और वह अपनी प्यास बुझा लेता है।'
कौवे जैसे यही चेष्टा अर्थात यत्नशीलता एक विद्यार्थी में होनी चाहिए। असफलताओं और चुनौतियों एक विद्यार्थी जितना यत्नशील होगा, जितनी उसमे जानने की इच्छा होगी होगा, वह उतना ही ज्ञान अर्जित कर सकेगा।
२. बको ध्यानं-बगुले जैसा ध्यान (Focus like a HERON): बगुला एक लम्बी चोंच, पतली टांगों और लम्बी व घुमावदार गर्दन वाला बहुत ही चालाक पक्षी है। यह बड़ी ही चालाकी से पानी में मछलियों का शिकार करने में सक्षम है। यह पानी में बिना हिले-डुले एक पैर पर सीधा खड़ा रहता है और मौका पाते ही अपने शिकार को झपट लेता है और ऐसा वह इसलिए कर पाता है क्यूंकि उसमे ध्यान केंद्रित करने की अद्भुत क्षमता है।
एक विद्यार्थी को भी बगुले जैसी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता स्वयं में विकसित करनी चाहिए। अध्ययन सामग्री पर पूर्ण ध्यान केंद्रित करना और उसे आत्मसात करना ही एक विद्यार्थी की सफलता की कुंजी है।
३. श्वान निद्रा-कुत्ते जैसी नींद (Sleep like a DOG): एक कुत्ता कभी भी गहरी नींद में नहीं सोता और हमेशा चौकन्ना रहता है। एक धीमी आवाज़ से भी उसके कान खड़े हो जाते हैं। इसी तरह एक विद्यार्थी में आलस्य का अंश मात्र भी नहीं होना चाहिए और उसे नींद सिर्फ उतनी ही लेनी चाहिए जितनाी शरीर व मस्तिष्क को स्वस्थ्य रखने के लिए आवश्यक हो। आलस्य व अत्यधिक निद्रा एक विद्यार्थी की असफलता का मुख्या कारण बन सकती है।
४. अल्पाहारी-कम खाने वाला (Eat Less): हम क्या खाते हैं और किस मात्रा में खाते हैं, इसका सीधा प्रभाव हमारे शरीर व मस्तिष्क पर पड़ता है। आवश्यकता से अधिक भोजन ग्रहण करने पर हम आलस्य का अनुभव करते हैं और इसका हमारे स्वस्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे हमरी पाचन शक्ति भी कमज़ोर पड़ती है और कई रोग हमें घेर लेते हैं।
एक विद्यार्थी को अपने शारीरिक और मानसिक स्वस्थ्य का विशेष ध्यान रखते हुए अल्पाहारी होना चाहिए ताकि शिक्षा प्राप्त करने के मार्ग में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
५. गृह त्यागी-घर से दूर रहने वाला (Don't let homesickness divert you): यहां पर इस बिंदु को ठीक से समझने की आवश्यकता है। प्राचीन समय में जब विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए गुरुकुल में जाया करते थे और वहीं रहकर अपने गुरु के मार्गदर्शन में अध्ययन किया करते थे तो इस तरह उन्हें घर छोड़ कर गुरुकुल में ही रहना पड़ता था।
आज के समय में भी उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थी दुसरे शहरों की तरफ रुख़ करते हैं और उन्हें घर छोड़कर जाना पड़ता है। परिजनों से भावनात्मक जुड़ाव कई बार शिक्षा के मार्ग में बाधक हो सकता है इसलिए एक आदर्श विद्यार्थी को परिवार का मोह त्यागकर अपने परिजनों से दूर रहने के लिए मानसिक रूप से हमेशा तैयार रहना चाहिए।
एक विद्यार्थी के जीवन में अनुशासन का विशेष महत्त्व है और अनुशासित रहकर ही वह इन पाँच लक्षणों को आत्मसात कर सकता है।




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