जीवन शैली में छोटे बदलावों के बड़े और सकारात्मक प्रभाव (Positive effects of few small changes in our lifestyle)
हमारा आशियाना, जहां हम रहते हैं अपने अपनों के साथ, दिन भर के काम की थकान के बाद जहाँ आकर हमें सबसे ज़्यादा सुकून मिलता है, जहां पर बिताया हर पल हमारे मन के खली बक्से को खूबसूरत यादों से भर देता है, जिसमे रहने वालों से होता है हमें सबसे ज़्यादा प्यार और जिससे दूर रहने पर रहते हैं हम हर दम बेक़रार। ऐसे आशियाने को हम किसी की नज़र नहीं लगने देता चाहते और चाहते हैं कि हमारा आशियाना हमेशा खुशयों से भरा रहे और इसके लिए हमें सिर्फ इतना सुनिश्चित करना है कि हमारे आशियाने में रहने वाला हर एक सदस्य प्रसन्नचित्त रहे, स्वस्थ रहे। अगर सभी सदस्य healthy & happy होंगे तो हमारे घर का माहौल तो खुद-ब-खुद खुशनुमा हो जायेगा। इसके लिए हमें अपने जीवन में कुछ बदलाव लाने होंगे। आइये, ऐसे ही कुछ छोटे-छोटे बदलावों के बारे में बात करते हैं जो देखने-सुनने में शायद छोटे लगें पर हमारे जीवन पर बहुत बड़े और सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
दिन की शुरुआत : सकारात्मक बदलावों के बारे में चर्चा की शुरुआत करते हैं दिन के दिन के पहले काम यानि कि सुबह उठने से। एक दिन में सिर्फ २४ घंटे ही होते हैं और हम अपने सभी ज़रूरी और ग़ैर ज़रूरी काम इन्ही २४ घंटों में करने के लिए बाध्य हैं। तो यह फैसला आपको लेना है कि पूरा दिन बीतने के बाद जब आप सोने के लिए जाएं तो आपके मन में संतुष्टि का भाव हो या अधूरे कामों की वजह से आपका मन अशांत हो। ज़ाहिर सी बात है कि हम सभी चैन की नींद सोना चाहते हैं और उसके लिए ज़रूरी है कि हम सुबह जल्दी उठें। विद्यार्थी सुबह जल्दी उठकर दिन के सबसे शांत समय में एकाग्रचित्त होकर अध्ययन कर सकते हैं, ऑफिस जाने वाले लोग पूरे दिन भर की भाग दौड़ से पहले अपने लिए या अपने अपनों के के लिए कुछ समय निकाल सकते हैं। संयुक्त परिवारों की गृहणियां तो सुबह जल्दी उठकर ही अनगिनत छोटे छोटे काम समाप्त कर लेती हैं ताकि घर के अन्य सदस्य अपना दिन समय से शुरू कर सकें। टाइम मैनेजमेंट की इससे बड़ी मिसाल पेश करना किसी के लिए भी मुश्किल है।
व्यायाम: अब बात करते हैं कि सुबह उठने के बाद दिनचर्या में अगला सकारात्मक बदलाव क्या करना है। यह एक ऐसा बदलाव है जिसे अपनाने की कोशिश तो हम सभी करते हैं पर शायद समय और दृढ निश्चय की कमी की वजह से इसे आदत में नहीं बदल पाते। जीवन यापन के लिए काम तो ज़रूरी है ही पर उतना ही ज़रूरी है खुद को उस काम के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार रखना। अगर आप नियमित रूप से व्यायाम, योगाभ्यास व ध्यान करने के लिए समय निकालें तो न सिर्फ आप शारीरिक रूप से सशक्त होंगे बल्कि दीर्घायु भी प्राप्त करेंगे। अगर आप चाहते हैं की सभी स्वस्थ रहें सभी निरोगी रहें तो इसकी शुरुआत आपको खुद से करनी होगी। अगर देश का हर एक नागरिक खुद को शारीरिक व मानसिक रूप से फिट रखने की ज़िम्मेदारी उठा ले तो एक स्वस्थ व सुदृढ़ समाज के निर्माण में अधिक समय नहीं लगेगा। क्या लगता है आपको?
खान-पान: अगला और एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण बदलाव हमें करना है अपने खान पान में। हमारा खान पान हमारे स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित करता है और अगर इसमें अभी से ही कुछ छोटे छोटे बदलाव किये जाएँ तो हम भविष्य में कई गंभीर रोगों से मुक्त रह सकते हैं। आपको बस इतना करना है कि बाहर का खाने से बचना है और जितना हो सके घर पर ही स्वच्छ और स्वास्थ्य वर्धक भोजन पकाकर खाना है। खाने में घी, तेल, नमक, मिर्च ,मसालों का कम से कम प्रयोग करना है और ज़्यादा से ज़्यादा हरी सब्ज़ियों व फलों का सेवन करना है। भोजन नियमित समय पर ही करना है और हाँ सबसे महत्त्वपूर्ण बात दिन में ३ से ४ लीटर पानी ज़रूर पिएं, केवल पर्याप्त मात्रा में पानी पीना ही आपको कई सामान्य बिमारियों से दूर रखेगा। क्यों है न ये आसान ?
बचत एवं निवेश: अगर अभी से ही भविष्य को सुरक्षित बना लिया जाये तो आधी चिंताएं तो खुद ही समाप्त हो जाएँगी और चिंता मुक्त व्यक्ति को एक खुशहाल जीवन जीने से कौन रोक सकता है !! शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के साथ ज़रूरी है के हम अपने आर्थिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें। भविष्य में आर्थिक रूप से मजबूत रहने का मंत्र है की हम अभी से ही बचत और निवेश करने की आदत डालें। बचत की आदत तो हमें बचपन से ही सिखाई जाती है लेकिन नई पीढ़ी बचत में थोड़ा कम यकीन रखती है। जैसे मौसम हमेशा एक जैसा नहीं रहता वैसे ही वक़्त कभी भी बदल सकता है। बुरे वक़्त का सामना मजबूती से करने के लिए ज़रूरी है की हम बचत करना सीखें और समय के साथ निवेश के माध्यमों के विषय में जानकारी हासिल करें। आज किया गया एक छोटा सा निवेश भी आपके भविष्य में एक बहुत बड़ी आर्थिक मदद दने में सक्षम होता है।
ज्ञानार्जन: शारीरिक और आर्थिक स्वास्थ्य के बाद अब बात करते हैं अपने मस्तिष्क के स्वास्थ्य की। ज्ञान कभी भी बेकार नहीं जाता, जीवन के किसी भी पड़ाव पर अर्जित किया हुआ ज्ञान न सिर्फ हमें एक शिक्षित नागरिक के तौर पहचान दिलाता है बल्कि हमें जागरूक भी बनता है। जागरूक रहकर आप दैनिक जीवन में आने वाली छोटी-बड़ी सभी मुश्किलों का हल आसानी से ढूंढ लेते हैं। ज्ञानार्जन सिर्फ विद्यार्थियों का ही काम नहीं है, बच्चे, बुज़ुर्ग, जवान सभी को नियमित रूप से अपनी रूचि के अनुसार कुछ पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। ये आपकी रूचि के अनुसार एक उपन्यास, पत्रिका, समाचार पत्र आदि कुछ भी हो सकता है। रात में सोने से पहले जो समय आप मोबाइल पर बिताते हैं उसे आप एक अच्छी पुस्तक से replace करके देखिये पढ़ने की महत्ता आप खुद ही समझ जायेंगे।
अच्छी नींद: अपना दिन समाप्त करते हुए एक अहम बदलाव की ज़रूरत है और वो है समय पर सोने और गहरी नींद लेने की। काम के दबाव की वजह से ज़्यादातर लोग देर से ही अपने दिन को समाप्त कर पाते हैं और सोने से पहले सोशल मीडिया पर समय बिताने की आदत तो किसी को समय पर सोने ही नहीं देती। पूरे दिन भर ऊर्जावान बने रहने के लिए ज़रूरी है की आप अपने शरीर को आवश्यकतानुसार आराम दें और काम से काम ७-८ घंटे की नींद लें। जिस तरह आप अपने मोबाइल की बैटरी low होने पर उसे charge करते हैं उसी तरह आपके शरीर को भी दोबारा के लिए एक अच्छी नींद से charge होने की ज़रूरत होती है। इसे बिलकुल भी नज़र अंदाज़ न करें।
"जीवन को खुशहाल बनाने के लिए अब तक जिन बदलावों की हमने बात की है उनको अपनाना अगर आपको मुश्किल लग रहा है तो इसे आसान बनाने के लिए मैं आपको एक टिप देता हूँ। और वो है २१ Days Rule . अगर आप किताबें पढ़ने के शौक़ीन हैं तो आपको इसके बारे में ज़रूर पता होगा। बड़े बड़े लेखकों की कलम से भी इस rule का ज़िक्र किया गया है। किसी भी बदलाव को अगर आप अपनी आदत बना चाहते हैं तो २१ दिनों तक नियमित रूप से पूरी ईमानदारी से उसका पालन करें और आप देखेंगे की २२वें दिन से वह बदलाव आपकी आदत में शुमार हो चुका होगा और आप बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के बड़ी आसानी से उसे आत्म सात कर चुके होंगे।"

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