मैं और मेरी तन्हाई अक़्सर ये बातें करते हैं कि तुम होतीं तो ऐसा होता, तुम होतीं तो वैसा होता। लता जी और अमिताभ जी की आवाज़ में गाये हुए एक मशहूर गीत की पंक्तियाँ हैं ये। कुछ दिनों पहले ये पंक्तियाँ मेरे कानों में पड़ीं तो अनायास ही इन पंक्तियों के भावार्थ ने मेरा वो अतीत याद दिला दिया जब मैं हिंदी माध्यम का मेधावी छात्र हुआ करता था (कृपा करके इस बात की पुष्टि के लिए मेरे विद्यालय न जाएँ) और ऊपर से हिंदी भाषा का कट्टर समर्थक पर अंदर ही अंदर अंग्रेजी बोलने और सीखने की इच्छा से ओत-प्रोत। उस समय मैं और मेरी तन्हाई अक़्सर ये बातें करते थे कि काश मैं भी कॉन्वेंट में पढ़ा होता; काश मैं भी फर्राटेदार अंग्रेजी बोल सकता; मैं भी ईंट का जवाब पत्थर से न सही पर अंग्रेजी का जवाब अंग्रेजी में तो दे पता। काश जब भी मुझे अंग्रेजी बोलना होता तो मुझे On लगेगा या Over, So लगाऊँ या Therefore; have been क्यों had been क्यों नहीं जैसे यक्ष प्रश्नों से गुज़रना न पड़ता पर वास्तव में मैं ये बात तन्हाइयों से ही कर पाता था क्योंकि मेरी सुनने वाला और था ही कौन? अपने क्लास में शायद सभी अंधे थे ...